कला
के एक हिस्से लय और ताल को सदियों से मेडिटेशन या ध्यान का एक रूप माना
जाता रहा है। विज्ञान बकायदा बीमारियों में इससे होने वाले फायदों को भी सामने लाने में सफल रहा है।
विशेषज्ञ
यह मानते हैं की मनुष्य के दिमाग में चल रही कई तरह की रासायनिक क्रियाओं
के बीच संतुलन साधने का काम भी संगीत करता है। इससे दिमाग को शांत रखने के
साथ ही एकाग्रता बढ़ाने, तनाव दूर करने तथा अन्य कई तरह की समस्याओं से बचने
में सहायता मिल सकती है।

फिटनेस से ऑटिज़्म तक
शोध
यह साबित कर चुके हैं कि संगीत और नृत्य जैसी विधाओं की सहायता से सामान्य
स्वास्थ्य से लेकर कैंसर, ऑटिज़्म, अल्जाइमर, डिप्रेशन आदि जैसी कई तकलीफों
में राहत मिल सकती है। पिछले कई सालों से दुनियाभर में चिकित्सक संगीत और
डांस का प्रयोग कई तरह के रोगियों के इलाज के लिए कर रहे हैं।
यह
पाया गया है कि नृत्य के दौरान होने वाले मूवमेंट्स दिमाग और शरीर के बीच
सही तालमेल बनाने का काम करते हैं। इससे खासतौर पर उन मरीजों को भी फायदा
मिलता है जिनके हाथ-पैरों की शक्ति किसी बीमारी की वजह से कम हो गई हो या
फिर वे सही तरीके से अपने दैनिक कार्यों तक के लिए शरीर को साध नहीं पाते।
ऐसे रोगियों को विशेषकर हाथ और पैरों के मूवमेंट्स के छोटे-छोटे सेशंस में
प्रैक्टिस करवाई जाती है।
न्यूरोलॉजिकल
विशेषज्ञ मानते हैं कि संगीत के जरिए कई मामलों में दिमाग को सही दिशा में
परिवर्तित होने के लिए भी प्रेरित किया जा सकता है।
कैंसर में भी लाभकारी
डांस
की ही तरह स्वरलहरियों का भी असर दिमाग और उसके जरिए फिर शरीर पर भी पड़ता
है। यही कारण है कि गर्भावस्था में शिशु और मां की सेहत के लिहाज से संगीत
सुनने की सलाह डॉक्टरों द्वारा भी दी जाती है। वहीं तनाव दूर करने के लिए
भी संगीत की मदद कई थेरेपिस्ट लेते हैं।
यही
नहीं कैंसर जैसी गंभीर बीमारियों में भी संगीत के असर से पीड़ा में कमी और
बीमारी से लड़ने की शक्ति मिल सकती है। संगीत की लहरों का असर दिमाग को शरीर
के साथ समन्वय बनाने में मदद करता है।
संगीत का असर
इस
तरह की थैरेपीज़ को क्रिएटिव थैरेपीज के रूप में अपनाया जाता रहा है और
इसका फायदा लगभग हर जीवित प्राणी में देखा गया है। वैज्ञानिकों ने माना है
कि संगीत का सकारात्मक असर पेड़-पौधों और जानवरों से लेकर इंसानों तक पर
होता है। यही कारण है कि गुणवत्ता पूर्ण फल और सब्जियां उगाने से लेकर
दुधारू पशुओं तक पर संगीत का सफल प्रयोग किया जा रहा है।
रिदम और शरीर
ठीक
इसी तरह डांस थैरेपी के जरिए शरीर को फिट बनाए रखने और कई सारी शारीरिक
व्याधियों से लड़ने में भी मदद मिलती है। चूंकि डांस का मतलब एक तरह की
एक्सरसाइज ही है इसलिए इससे पूरे शरीर की मांसपेशियों और हड्डियों को मजबूत
बनाने में भी सहायता मिलती है।
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